प्रकृति के विविध रूपों की सचित्र प्रस्तुति
भारत ऋतुओं का देश है, जहां प्रकृति का वैविध्यपूर्ण सौंदर्य बिखरा पड़ा है। यही कारण है, कि फूलों का देश जापान को छोड़कर आने की दु: खद ...
प्रकृति के विविध रूपों की सचित्र प्रस्तुति
भारत ऋतुओं का देश है, जहां प्रकृति का वैविध्यपूर्ण सौंदर्य बिखरा पड़ा है। यही कारण है, कि फूलों का देश जापान को छोड़कर आने की दु: खद ...
बच्चे तो बच्चे, बाप रे बाप : रवीन्द्र प्रभात के हाइकु
(एक) भागते बच्चे हवा से होड़ लेके बदहवास। (दो) रार ठानूंगा जाऊंगा शिखर पे मैं न मानूंगा । (तीन) उम्मीद रख समर को जीतके आन...
ब्लॉगोत्सव-२०१४, संस्कार
भा रतीय संस्कृति में गर्भ धारण से लेकर मृत्यू प्रयन्त 16 संस्कारों की अवधारणा पायी जाती है। इन सभी संस्कारों का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक ...
प्रीति-नेस विवाद, बबूल के पेड़ पर आम........!!
फि ल्मों की दीवानगी के दौर में कई साल पहले एक बार प्रख्यात गायिका लता मंगेशकर मेरे जिला मुख्यालय में कार्यक्रम देने आई, तो मेरे शहर के...
ब्लॉगोत्सव-२०१४ में तृतीय दिवस की प्रस्तुति
ब्लॉगोत्सव-२०१४ में तृतीय दिवस का कार्यक्रम दिनांक: 04.06.2014 सुबह 10.00 बजे: अली सैय्यद और उनकी उम्मतें (ब्लॉग: परिक...
ब्लॉगोत्सव-२०१४, द्वितीय दिवस: अज़ब-गजब अविस्कार
स्वागत है आप सभी का ब्लॉगोत्सव-२०१४ के प्रथम दिवस के अज़ब-गजब कार्यक्रम में मानव के आविष्कारों के इतिहास में बहुत सारे आविष्कार देखने क...
ब्लॉगोत्सव-२०१४, प्रथम दिवस: अज़ब-गजब वर्ल्ड रिकॉर्ड
स्वागत है आप सभी का ब्लॉगोत्सव-२०१४ के प्रथम दिवस के अज़ब-गजब कार्यक्रम में दुनिया अनोखी जगह है क्योंकि यह इन्सानों से भरी है। और उन इ...
हमारे स्वयं के हित में है जल व अन्य संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग
कुछ दिन पहले एक विवाहोत्सव में जाना हुआ। भव्य आयोजन था। खाना शुरू करने से पहले हाथ धोने के लिए पानी की तलाश की लेकिन कहीं पर भी प...
वक्त की ’आंधी’ में गुम हो गईं सुचित्रा सेन
स्मृति शेष (मृत्यु 17 जनवरी ) फि ल्मों की दुनिया बड़ी निराली होती है। ग्लैमर, चकाचैंध और शोहरत से भरपूर। नायक-नायिका जब परदे प...
दलित समाज की व्यथा
अभी हाल ही में मेरा एक उपन्यास आया है ताकि बचा रहे लोकतंत्र जिसकी यत्र -तत्र-सर्वत्र चर्चा हो रही है इसी चर्चा के क्रम में आज दैनिक जन...
सुबह-ए-बनारस
एक कविता करतालों की जगह बजने लगा है पाखण्ड अन्धविश्वास रुढियों को कंधे पे लटकाए सीढियां चढ़ रहा है चट्ट चट्ट लज्जित है सुबह क...
गुरु का अभिप्राय
गुरु (संस्कृत शब्द, अर्थात भारी या महत्वपूर्ण, इसलिए आदरणीय या श्रद्धेय ), हिन्दू धर्म में एक व्यक्तिगत अध्यात्मिक शिक्षक या निर्देशक, जिसने...
अज़ान का मतलब है उद्घोषणा
हमारा भारतीय समाज कई संस्कृति और कई भाषाओं का अनोखा गुलदस्ता है , गाहे- बगाहे हमें विभिन्न भाषाओँ के उन शब्दों को अंगीकार करने की आवश्यकता म...
"ले अभाव का घाव ह्रदय का तेज मोम सा गला अश्रु बन ढला सुबह जो हुई सभी ने देख कहा --- शबनम है !" - सरस्वती प्रसाद ज़िन्दगी के दर्द...
अपनी सकारात्मक सहभागिता का विश्वास दिलाता हूँ : सुमन सिन्हा
जैसा कि आप सभी को विदित है कि आगामी कुछ महीनों बाद लखनऊ में अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब्लॉग उत्सव मनाने की तैयारी चल रही है और इसके क्रियान्वयन ...
क्या हिन्दी में बेहतर ब्लॉग लेखन की शुरुआत हो चुकी है ?
आज जिस प्रकार हिंदी ब्लॉगर साधन और सूचना की न्यूनता के बावजूद समाज और देश के हित में एक व्यापक जन चेतना को विकसित करने में सफल हो रहे हैं...
सलाम एक ग़रीब की महानता को
आज दिनांक 31.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत बीसवें दिन के कार्यक्रम का लिंक - ब्लोगोत्सव की आखिरी परिचर्चा : क्या आत्मा अ...
समान्तर मीडिया की दृष्टि से कितनी सार्थक है हिन्दी ब्लोगिंग .......
आज दिनांक 28.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत उन्नीसवें दिन के कार्यक्रम का लिंक - तीन दिवसीय प्रथम अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब...
अंग्रेज तो हिन्दुस्तान को आज़ाद छोड़ कर चले गए, लेकिन अपने पीछे हिंदी भाषा को अंग्रेजी का गुलाम बना कर गए
आज दिनांक 26.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत अठारहवें दिन प्रकाशित पोस्ट का लिंक- एक सीमा तक करें शैतानियाँ, ना किसी का दि...
ब्लोगिंग को विचारों का साझा मंच बनाएं, गुणवत्ता का ध्यान रखें : देवमणि पाण्डेय
श्री देवमणि पाण्डेय का 4 जून 1958 को अवध की माटी में जन्म। ठेंठ सुल्तानपुरी। हिंदी और संस्कृत के सहज साधक। कवि तो हैं ही मंच संचालन के महार...