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बच्चे तो बच्चे, बाप रे बाप : रवीन्द्र प्रभात के हाइकु बच्चे तो बच्चे, बाप रे बाप : रवीन्द्र प्रभात के हाइकु

(एक) भागते बच्चे हवा से होड़ लेके बदहवास। (दो) रार ठानूंगा जाऊंगा शिखर पे मैं न मानूंगा । (तीन) उम्मीद रख समर को जीतके आन...

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11:54 PM

सुबह-ए-बनारस सुबह-ए-बनारस

एक कविता करतालों की जगह बजने लगा है पाखण्ड अन्धविश्वास रुढियों को कंधे पे लटकाए सीढियां चढ़ रहा है चट्ट चट्ट लज्जित है सुबह क...

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1:28 AM

इस कविता का एक-एक शब्द अनमोल है...! इस कविता का एक-एक शब्द अनमोल है...!

 मैंने हमेशा एक फकीरी ज़िन्दगी जी है, 'क्यूँ' मेरे शब्दकोष में कभी नहीं रहा......यह 'क्यूँ' बस दूर करता है. अमृता मेरी जिं...

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2:45 AM
 
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