दलित समाज की व्यथा
अभी हाल ही में मेरा एक उपन्यास आया है ताकि बचा रहे लोकतंत्र जिसकी यत्र -तत्र-सर्वत्र चर्चा हो रही है इसी चर्चा के क्रम में आज दैनिक जन...
दलित समाज की व्यथा
अभी हाल ही में मेरा एक उपन्यास आया है ताकि बचा रहे लोकतंत्र जिसकी यत्र -तत्र-सर्वत्र चर्चा हो रही है इसी चर्चा के क्रम में आज दैनिक जन...
सुबह-ए-बनारस
एक कविता करतालों की जगह बजने लगा है पाखण्ड अन्धविश्वास रुढियों को कंधे पे लटकाए सीढियां चढ़ रहा है चट्ट चट्ट लज्जित है सुबह क...
गुरु का अभिप्राय
गुरु (संस्कृत शब्द, अर्थात भारी या महत्वपूर्ण, इसलिए आदरणीय या श्रद्धेय ), हिन्दू धर्म में एक व्यक्तिगत अध्यात्मिक शिक्षक या निर्देशक, जिसने...
अज़ान का मतलब है उद्घोषणा
हमारा भारतीय समाज कई संस्कृति और कई भाषाओं का अनोखा गुलदस्ता है , गाहे- बगाहे हमें विभिन्न भाषाओँ के उन शब्दों को अंगीकार करने की आवश्यकता म...
"ले अभाव का घाव ह्रदय का तेज मोम सा गला अश्रु बन ढला सुबह जो हुई सभी ने देख कहा --- शबनम है !" - सरस्वती प्रसाद ज़िन्दगी के दर्द...
अपनी सकारात्मक सहभागिता का विश्वास दिलाता हूँ : सुमन सिन्हा
जैसा कि आप सभी को विदित है कि आगामी कुछ महीनों बाद लखनऊ में अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब्लॉग उत्सव मनाने की तैयारी चल रही है और इसके क्रियान्वयन ...
क्या हिन्दी में बेहतर ब्लॉग लेखन की शुरुआत हो चुकी है ?
आज जिस प्रकार हिंदी ब्लॉगर साधन और सूचना की न्यूनता के बावजूद समाज और देश के हित में एक व्यापक जन चेतना को विकसित करने में सफल हो रहे हैं...
सलाम एक ग़रीब की महानता को
आज दिनांक 31.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत बीसवें दिन के कार्यक्रम का लिंक - ब्लोगोत्सव की आखिरी परिचर्चा : क्या आत्मा अ...
समान्तर मीडिया की दृष्टि से कितनी सार्थक है हिन्दी ब्लोगिंग .......
आज दिनांक 28.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत उन्नीसवें दिन के कार्यक्रम का लिंक - तीन दिवसीय प्रथम अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब...
अंग्रेज तो हिन्दुस्तान को आज़ाद छोड़ कर चले गए, लेकिन अपने पीछे हिंदी भाषा को अंग्रेजी का गुलाम बना कर गए
आज दिनांक 26.05.2010 को परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 के अंतर्गत अठारहवें दिन प्रकाशित पोस्ट का लिंक- एक सीमा तक करें शैतानियाँ, ना किसी का दि...